एक ऐसा शिव मंदिर जिसे भूतों ने एक रात में बनाया

जावरा / पिपलौदा – मध्य प्रदेश का ‘ककनमठ मंदिर’ (Kakanmath Temple): वो 115 फ़ीट ऊँचा शिव मंदिर जो हवा में झूलता है, लेकिन गिरता नहीं! और ‘ड्राई एशलर मेसनरी’ (Dry Ashlar Masonry) का वो ‘फ्रिक्शनल इंटरलॉकिंग’ (Frictional Interlocking) डिज़ाइन!

ये भगवान शिव का वो खौफनाक दरबार है जिसे देख कर लगता है कि ये अभी गिर जाएगा। ‘स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग’ (Structural Engineering) इसे बिना सीमेंट वाला वो मास्टरपीस मानती है जो 1000 साल के तूफ़ानों का सीना चीर दे!

 

यार, फैक्ट पर हम आपको मध्य प्रदेश के सिहोनिया गाँव के एक ऐसे खौफनाक और वीरान मंदिर में ले चलेंगे, जिसे देखकर आपके दिल की धड़कन रुक जाएगी! ये 11वीं सदी का ‘ककनमठ मंदिर’ है। भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर 115 फ़ीट (115-foot) ऊँचा है! बाबू, माइथोलॉजी के अनुसार, इस पूरे के पूरे विशाल मंदिर को ‘भूतों’ (Ghosts/Spirits) ने सिर्फ ‘एक ही रात’ में बनाया था, और सुबह होते ही वो इसे अधूरा छोड़कर चले गए। इस मंदिर का सबसे डरावना सच ये है कि इसे बनाने में 1 ग्राम भी चूना, सीमेंट या लोहे का इस्तेमाल नहीं हुआ है! ये मंदिर बिल्कुल एक ‘कंकाल’ (Skeleton) की तरह दिखता है जहाँ सिर्फ भारी पत्थर एक के ऊपर एक बस ‘रखे’ हुए हैं। देखकर ऐसा लगता है जैसे हवा का एक झोंका आएगा और ये 115 फ़ीट का पहाड़ भरभरा कर गिर जाएगा! लेकिन बाबू, पिछले 1000 सालों के भयंकर तूफ़ान, आंधी और भूकंप भी इस बिना सीमेंट वाली इमारत का एक पत्थर नहीं गिरा पाए!

 

जब मॉडर्न ‘सिविल इंजीनियर्स’ ने इस डरावने मंदिर को नापा, तो उनका दिमाग़ हैंग हो गया! विज्ञान की भाषा में इसे ‘ड्राई एशलर मेसनरी’ (Dry Ashlar Masonry) और ‘फ्रिक्शनल इंटरलॉकिंग’ (Frictional Interlocking) का दुनिया का सबसे अजेय डिज़ाइन कहते हैं। 11वीं सदी के डिज़ाइनरों ने इन भारी पत्थरों को इतने परफ़ेक्ट ‘जियोमेट्रिक कट्स’ (Geometric cuts) के साथ तराशा था कि हर पत्थर का वज़न (Weight) अपने नीचे वाले पत्थर के साथ भयंकर ‘घर्षण’ (Friction) पैदा करके लॉक हो जाता है! बिना सीमेंट के होने की वजह से जब भूकंप आता है, तो ये पत्थर टूटते नहीं, बल्कि एक-दूसरे के ऊपर ‘माइक्रो-शिफ्ट’ (Micro-shift) करके झटके को पी जाते हैं! भगवान शिव का ये कंकाल जैसा मंदिर कुदरत के तूफ़ानों से खेलना जानता है!

 

➡️ फैक्ट्स:

• मध्य प्रदेश के सिहोनिया में मौजूद ‘ककनमठ मंदिर’ 11वीं सदी का एक बेहद खौफनाक और विशाल शिव मंदिर है।

• माइथोलॉजी के अनुसार, इस 115 फ़ीट ऊँचे मंदिर को भूतों (Spirits) ने सिर्फ 1 रात में बिना किसी सीमेंट के बनाया था।

• ये मंदिर बिल्कुल एक पत्थरों के ‘कंकाल’ (Skeleton) जैसा दिखता है जो लगता है कि अभी गिर जाएगा।

• लेकिन बिना किसी सीमेंट या लोहे के ये मंदिर पिछले 1000 सालों के भूकंप और तूफ़ान में अजेय खड़ा है!

• विज्ञान और ‘स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग’ के अनुसार, ये ‘ड्राई एशलर मेसनरी’ (Dry Ashlar Masonry) का 100% परफ़ेक्ट डिज़ाइन है।

• पत्थरों को कुछ इस तरह काटा गया है कि उनका अपना ही भारी वज़न ‘फ्रिक्शनल इंटरलॉकिंग’ (Friction) से उन्हें लॉक कर देता है।

• सीमेंट न होने से इमारत ‘फ्लेक्सिबल’ (Flexible) हो जाती है और बड़े से बड़े भूकंप का झटका (Shock) आसानी से

सह लेती है!

 

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